21.01.2018 को टाइम्स नाउ पर माननीय प्रधानमंत्री का साक्षात्कार
21.01.2018 को टाइम्स नाउ पर माननीय प्रधानमंत्री का साक्षात्कार
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- आसियान-भारत: साझा मूल्य, समान नियति: नरेंद्र मोदी
- जम्मू-कश्मीर छात्र विनिमय कार्यक्रम ‘मैत्री यात्रा’ संपन्न हुआ
प्रधानमंत्री कार्यालय
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
प्रधानमंत्री कार्यालय
कम्बोडिया के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा प्रेस वक्तव्य (27 जनवरी, 2018)
Your Excellency कम्बोडिया साम्राज्य के प्रधान मंत्री हुन सेन,
शिष्टमंडल के सम्मानीय सदस्य,
माननीय अतिथिगण, मीडिया के मित्रों,
देवियों और सज्जनों,
नमस्कार।
प्रधान मंत्री हुन सेन का एक बार फिर स्वागत करते हुए मुझे बेहद प्रसन्नता हो रही है। उनकी यह state visit 10 वर्ष के अंतराल के बाद हो रही है।
यद्यपि प्रधान मंत्री जी आप स्वयं भारत से भली-भांति परिचित हैं, और भारत आपसे। मुझे विश्वास है कि इस यात्रा के दौरान आपको भारत की आर्थिक प्रगति और सामाजिक परिवर्तनों को नज़दीक से देखने का अच्छा अवसर मिला है।
दो दिन पहले हमने ASEAN INDIA Comemorative Summit के दौरान ASEAN-भारत सहयोग पर विस्तार से चर्चा की। भारत और 10 ASEAN देशों के नेताओं ने महत्वपूर्ण निर्णय लिये ताकि भारत और ASEAN का सहयोग आने वाले वर्षों में नई ऊँचाईयों को छुये।
इस सम्बन्ध में प्रधान मंत्री हुन सेन ने मेरे निमन्त्रण को स्वीकार कर Summit में उपस्थित होकर हमारा सम्मान बढ़ाया है।
यही नहीं, उन्होने summit के दौरान विचार-विमर्श और उसके निर्णयों में बहुमूल्य योगदान दिया। इसके लिए मैं उन्हें हृदय से धन्यवाद देता हूँ।
Friends,
भारत कंबोडिया के पुरातन काल के ऐतिहासिक सम्बन्ध पिछली शताब्दि के उत्तरार्ध में और भी प्रगाढ़ हुए जब कंबोडिया के राजनीतिक परिवर्तनों के दौरान भारत अपने पुराने मित्र और उसके नागरिकों के साथ-साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा।
प्रधान मंत्री हुन सेन और मैं इस बात पर सहमत हैं कि समसामयिक आवश्यकताओं के अनुसार आज हमें अपने सम्बन्धों को हर क्षेत्र में और भी गहरा बनाने की ज़रुरत है।
भारत-कंबोडिया के साथ अपनी साझेदारी को आर्थिक, सामाजिक विकास, capacity building, संस्कृति, व्यापार, tourism और सामान्य लोगों के बीच सम्बन्ध जैसे सभी क्षेत्रों में बढ़ाने को तैयार ही नहीं प्रतिबद्ध है।
हमारे सांस्कृतिक सम्बन्धों में हमारी साझा विरासत का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। 12वीं शताब्दी में बनाये गये ऐतिहासिक अंकोरवाट मंदिर का restoration इस सहयोग का उदाहरण है।
भारत को प्रसन्नता है कि कंबोडिया में इस सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और समवर्धन के लिए हम योगदान कर सके। हमारी भाषाएं भी पाली और संस्कृत के स्रोतों से निकलीं हैं। यह हर्ष का विषय है कि हमारे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की जड़ें बहुत गहरी हैं। इसलिये आपसी Tourism को बढ़ावा देने के लिए संभावनायें हैं।
Friends,
भारत के लिए यह खुशी की बात है कि हमारा मित्र देश कंबोडिया तेज़ी से आर्थिक प्रगति कर रहा है और पिछले दो दशक में सालाना 7 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से वृद्धि करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। क्योंकि हमारे मूल्य और संस्कृति मिलती जुलती है, इसलिए हमारे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने में एक स्वाभाविक synergy हो सकती है।
कंबोडिया की liberal economic policies और ASEAN Economic Community की स्थापना कंबोडिया में भारतीय निवेश के लिए एक अच्छा अवसर प्रदान करतीं है।
खासतौर पर स्वास्थ्य, औषधी, information technology, कृषि, automobile और auto पुर्जे, textile, इत्यादि क्षेत्रों में। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में हमारे द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि होगी और भारत से और भी अधिक निवेशक तथा व्यापारी कंबोडिया में लाभप्रद उपस्थिति बना सकेंगे।
Friends,
Development co-operation भारत कंबोडिया के संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंबोडिया के सामाजिक, आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण साथी के तौर पर भारत की प्रतिबद्धता हमेशा ही रही है, और आगे भी रहेगी।
हमने कंबोडिया सरकार की ज़रुरतों के मुताबिक projects के लिए कई और line of credit प्रस्तावित की हैं। खासतौर पर स्वास्थ्य, connectivity, digital connectivity के क्षेत्रों में।
हर साल भारत कंबोडिया में 5 quick impact project क्रियान्वित कर रहा है। इन projects की संख्या सालाना 5 सेबढ़ाकर 10 करने का निर्णय हमने लिया है। पांच सौ करोड़ रुपये का project development fund हमने स्थापित किया है।
इस fund का इस्तेमाल भारत के उद्योग और business का विस्तार करने के लिए और supply chain को cost effective बनाने के लिए किया जा सकता है। हम कंबोडिया में एक Centre of Excellence in IT and IT enabled service की स्थापना कर रहे हैं।
भारत पांच दशक से भी अधिक पुराने Indian Technology & Economic Cooperation Programme में कंबोडिया का सक्रिय साथी है। एक हज़ार चार सौ से भी अधिक कंबोडिया के नागरिकों ने इस programme के द्वारा capacity building की training हासिल की है।
हम भविष्य में भी यह कार्यक्रम जारी रखेंगे और कंबोडिया की जरुरतों के मुताबिक इसका विस्तार के लिए हम तैयार हैं।
Friends,
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर हमारे दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग है और अनेक क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर हमारे विश्वसनीय सम्बन्ध हैं। मौजूदा synergy को और भी बढ़ाते हुए भारत और कंबोडिया एक दूसरे का अंतर्राष्ट्रीय मंच पर समर्थन प्रदान करते रहेंगे।
अंत में, मैं प्रधान मंत्री हुन सेन को भारत के अभिन्न मित्र और सम्मानीय अतिथि के रुप में उनकी इस भारत यात्रा के लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं आशा करता हूँ कि उनका भारत में प्रवास सुखद और यादगार रहेगा।
मैं यह भी आशवासन देता हूँ कि भारत आने वाले समय में कंबोडिया के साथ और भी घनिष्ठ सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है ताकि कंबोडिया और उसके नागरिकों के साथ हमारे गहरे और परम्परागत गहरे संबंध और भी मज़बूत हो सके।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
जम्मू-कश्मीर छात्र विनिमय कार्यक्रम ‘मैत्री यात्रा’ संपन्न हुआ
प्रकाशन तिथि: 26 JAN 2018 7:21PM by PIB Delhi
जम्मू-कश्मीर छात्र विनिमय कार्यक्रम ‘मैत्री यात्रा’ का समापन समारोह आज राष्ट्रीय बाल भवन में संपन्न हो गया। छात्र विनिमय कार्यक्रम का आयोजन मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जम्मू-कश्मीर के नौजवानों को भारत के विभिन्न भागों की संस्कृति, भाषा और विकास गाथाओं से अवगत कराने के लिए आयोजित किया गया। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर समारोह में मुख्य अतिथि थे। मानव संसाधन राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह और जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री श्री सैयद मुहम्मेद अल्ताफ बुखारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इस अवसर पर श्री जावड़ेकर ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के युवाओं को बाकी देश से जोड़ना है और भाईचारे तथा सद्भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने, सीखने और एक-दूसरे के साथ जानकारियों को साझा करने के लिए विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कश्मीरी दोस्तों के ठहरने लिए अपनी कक्षाएं खाली करके ‘अतिथि देवो भव’ की सच्ची भावना प्रदर्शित करने वाले राष्ट्रीय बाल भवन के विद्यार्थियों की सराहना की।
श्री जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ऐसी प्रणाली तैयार कर रही है जो सभी विद्यार्थियों को एमसमान अवसर उपलब्ध कराएगी जिससे सभी राष्ट्रनिर्माण में अपना योगदान कर सकेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली के स्कूलों के 500 बच्चे गर्मियों में जम्मू-कश्मीर की यात्रा करेंगे।
समारोह में अपने भाषण में मानव संसाधन राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने प्रेम, शांति और सद्भाव के संदेश के प्रचार के लिए जम्मू-कश्मीर के छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जो कुछ किया वह शायद सरकार के कदमों से भी संभव न हो पाता। उन्होंने कहा कि शिक्षा और सीखनाआज के समाज की दो अतयंत महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं हैं क्योंकि आज के नौजवान ही कल के नेता बनेंगे.
इस अवसर पर अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए छात्र विनिमय कार्यक्रम के संचालन के लिए कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि इससे देश का सामाजिक ताना-बाना मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कमश्मीर के बच्चों को राष्ट्रीय बाल भवन के बच्चों ने सचमुच की जादू की झप्पी दी।
जम्मू-कश्मीर के स्कूलों के नौवीं से बारहवीं तक के 500 विद्यार्थी 50 सुपरवाइजरों के साथ 18 जनवरी 2018 को दिल्ली पहुंचे। इनमें से 300 बाल भवन में ठहरे और 100-100 दो केन्द्रीय विद्यालयों और दो नवोदय विद्यालयों में रुके।
इन 500 बच्चों में सरकारी और प्राइवेट दोनों ही तरह के स्कूलों के बच्चे शामिल थे। सरकारी स्कूल के 10 बच्चों के साथ प्राइवेट स्कूल के एक बच्चे को लेकर टोलियां बनायी गयीं। बच्चों ने तीन दिन स्कूलों में बिताए। 20 जनवरी 2018 को वे अपने मार्गदर्शक साथी के साथ दिल्ली दर्शन के लिए गये और चिडि़याघर,राजघाट और लालकिला समेत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कई स्थानों को देखा।
जम्मू-कश्मीर के बच्चे दिल्ली विश्वविद्यालय, आईआईटी दिल्ली, रेलवे म्यूजियम, मदर डेरी संयंत्र, मैट्रो की सवारी, पीवीआर वसंत कुंज में फिल्म देखने, जादू का शो देखने के लिए भी गये। उन्होंने भव्य गणतंत्र दिवस समारोह भी देखा. इन बच्चों ने जम्मू-कश्मीर के कई सांस्कृतिक गीत भी गाए। मैत्री यात्रा की कुछ झलकियां समापन समारोह में भी दिखायी गयीं।
धन्यवाद।
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